निवेदन

इस लघु पुस्तिका में 150 दिव्य मोतिओं को अ. मु. प. पू. श्री नारायणभाई गी. ठक्कर ने भगवान श्री स्वामिनारायण के अनन्य महान संत अनादि महामुक्तराज श्री अबजीबापाश्री के दिव्य व्याख्यान एवं उपदेश में से संयोजा है।

श्री अबजीबापाश्री के मुख कमल से नि:सृत दिव्य अनुकंपन युक्त शब्द, मुमुक्षु जीव जो ईश्वर के साक्षात्कार की आकांक्षा रखते हैं, उनके लिए आध्यात्मिक ऊध्वीर्करण का स्त्रोत है।

यह सुभाषित मूलत: गुजराती में है। उनका हिंदी भाषिओं के लिए हिंदी में अनुवाद किया है।

शान्ति, खुशी एवं मुक्ति के मार्ग पर अग्रसर होने वालों के हाथो में इन पवित्र मोतिओं को प्रदान करते हुए प्रसन्नता की अनुभूति करते हैं।

विशेष प्रसन्नता यह है कि इस लघु पुस्तिका का प्रकाशन श्री स्वामिनारायण डिवाइन मिशन के रजत जंयती समारोह के अवसर पर हो रहा है।

सं. 2063, महा वद चौदश

ई. स. 2007, 16 फरवरी

प्रकाशन समिति

श्री स्वामिनारायण डिवाइन मिशन