१६. ब्रह्मचर्याश्रम का पुनःस्थापन
स्वामिनारायण ने ब्रह्मचर्य का असरकारक उपदेश देकर समाज से चारित्र की शिथिलता को दूर किया; तथा स्त्रीपुरुष के शील की रक्षाकर भारतीय संस्कृति का गौरव बढाया। अपने शिष्यों के चारित्रशील एवं संयमी जीवन द्वारा उन्होंने निरंकुश एवं स्वच्छंदी बने त्यागी साधुओं को सुधारा; अधःपतन को प्राप्त धर्मगुरुओं के लिए संयम का आदर्श स्थापित किया तथा लुप्त हुए ब्रह्मचर्याश्रम को पुनः स्थापित किया।