७. विचारधारा का शुद्धिकरण
रामानंदस्वामी के देहोत्सर्ग के पश्चात स्वामिनारायण ने निज अवतारी कार्य का प्रारंभ साधुओं की अलग-अलग मंडली (मंडल) बाँधकर किया। प्रत्येक मंडल को भिन्न-भिन्न प्रदेश में उपदेशार्थ भेजा; स्वयं भी एक मंडल लेकर घूमे। इस प्रकार स्वामिनारायण ने प्रथम अपने संतमंडल द्वारा भागवत धर्म का दिव्य संदेश घर-घर पहुँचाया तथा लोगों की विचारधारा शुद्ध बनाकर उनको आत्मोन्नति के मार्ग की ओर प्रेरित करने लगे।