१९. आलस्यप्रमाद रहितता
सहजानंदजीने अपने प्रवृत्तिशील जीवन तथा व्यवहार द्वारा समाज में नजर आते आलस्यप्रमाद को दूर किया। अवकाश के समय को आलस्य या व्यर्थ की प्रवृत्ति में व्यतीत न कर हरिभक्ति तथा मानवकल्याण के कार्य करने में व्यतीत करने के हेतु लोगों को प्रेरित किया।