२०. मानवकल्याण के हेतु मंदिरों की रचना

समस्त मानवपरिवार की परमशांति के लिए स्वामिनारायण ने सुंदर सुविधावाले, यम-नियम-संयमयुक्त साधुपरमहंसो से शोभित, भजन कीर्तनों से गुँजते तथा परब्रह्म परमात्मा के दिव्य प्रकाश प्रसारित करनेवाले मंदिरों की रचना की। उन्होंने कहा : ‘मन तथा इंद्रियों का जहाँ आरोहण हो तथा परमात्मा के दिव्य स्वरूप में स्थिर हो सके वह स्थान ही वस्तुतः मंदिर।’